राशुख़दार की दबंगई! नीलकमल बस में फंसे यात्री, प्रशासन बना मूकदर्शक
रात के अंधेरे में सड़क पर छोड़ दिए गए 27 यात्री, महिलाओं की सुरक्षा भी दांव पर – क्या रसूख ही कानून है?
हिन्द शिला ( केवलारी):-मामला इंदौर से छिंदवाड़ा जा रही नीलकमल बस का है जिसका नंबर mp13p1441 है जो देवास जिले के सोनकक्ष थाने अंतर्गत रात में करीब 12 बजे अचानक खराब हो गई। बस में लगभग 27 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। घने अंधेरे में हाईवे पर असुरक्षित हालात में फंसे यात्रियों को वाहन मालिक द्वारा कोई वैकल्पिक सुविधा नहीं दी गई।
हमारे विश्वसनीय सूत्रों का दावा है की रसूखदार बस मालिक मिनगलानी ट्रैवल छिंदवाड़ा से है ।
राशुखदारों की दबंगई।
मनमानी का आलम यह था कि उन्होंने यात्रियों की परवाह किए बिना उन्हें पहले से भरी दूसरी बस में ठूंसने की कोशिश की। यात्रियों ने जब विरोध किया, तो प्रशासन भी मिनगलानी की दबंगई के आगे बेबस नजर आया।
यात्रियों ने लगाई न्याय के लिए गुहार।
आखिरकार, थाना सोनकक्ष को सूचना दी गई, लेकिन वहां भी मामला केवल समझौते तक सीमित रहा। यात्रियों को राहत पहुंचाने में प्रशासन की लचर व्यवस्था और रसूखदारों का दखल साफ देखा गया।
सवाल यह उठता है कि:
क्या आम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का कोई मोल नहीं?
रसूखदारों की मनमानी के आगे प्रशासन कब तक झुका रहेगा?
क्या भविष्य में भी यात्री इसी तरह परेशान होते रहेंगे, या कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
सरकार और प्रशासन को यह तय करना होगा कि जनता की सुविधा महत्वपूर्ण है या रसूखदारों का दबदबा!


