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Wednesday, April 22, 2026

कायर समाज एक दिन अपने विनाश का कारण खुद बनेगा -रवि जंघेला

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दिल्ली का एक सीसीटीवी वीडियो कल से वायरल हो रहा है जिसमे एक मुश्लिम युवक ने एक नाबालिक युवती पर चाकू से कई हमले किये और अंत मे उसके सर पर पत्थर पटक पटक कर बेरहमी से उसे मार दिया । युवक चाकू से वार कर रहा था,उसके आस पास लगभग 12 से 17 लोग गुजरे लेकिन शायद सारे ही नामर्द प्रवत्ति के लोग थे क्योंकि एक ने भी सही तरीके से उस युवक को रोकने की कोसिस नही की। अगर वो लोग रोकते तो युवती बच जाती। क्या हमारा देश मुर्दों का देश बनते जा रहा है, यहां लोगों की आत्मा लगभग मर चुकी है। यहां ना कोई गलत को गलत कहता ना लोग मिलकर गलत का विरोध करते । यहां अब किसी का खून नही खोलता । सबने आंखों पर पट्टी बांधी हुई है -बस अंधे ,बहरे, गूंगे बन कर चलते रहो । आस पास मत देखो चाहे कितना भी गलत क्यो ना हो रहा हो ।अपने परिवार को छोड़कर लोगों को किसी से मतलब नही है, चाहे उनके पड़ोस में ही कोई भूखा मर जाए, ऐसी जिंदगी क्या काम आएगी तुम्हारे ?

जो तुम्हे मतलबी या अंधा बना रही है । आज से लगभग साल भर पहले शहर से बाहर जंगल की तरफ मैं घूम रहा था । वहीं रोड के किनारे एक आदमी और महिला रुके हुए थे । सुनसान एरिया था , आसपास कोई दिखाई नही दे रहा था । आदमी एकदम गुस्से में था उसने महिला पर हाथ उठाया और महिला रो रही थी । मुझे लगा वो आदमी उसके साथ कुछ गलत ना कर दे -मैंने गाड़ी दूर रोकी जहां से उन्हें मैं दिखाई ना दुं। और देखने लगा – मेरे मन मे सवाल आया की मैं इस महिला की मदद कैसे करूँ ?

क्योकि वो आदमी शरीर में मुझसे 3 गुना ताकतवर दिख रहा था । फिर ये सोचकर रुका रहा की , अगर अगर ये आदमी यहां इसके साथ कुछ गलत कर देता है तो मेरे होने ना होने का क्या फायदा , जो कायरों की तरह भाग जाऊं । मैं वहीं रूका रहा , बाद में पता चला की वो दोनो शायद पति- पत्नी थे और किसी बात को लेकर शायद दोनो में तनाव था । फिर दोनो गाड़ी चालू करके शहर की ओर चले गए मैं भी पीछा करते करते शहर तक वापस आया और जब वो मार्किट में आ गए तब मैंने उनका पीछा करना छोड़ दिया ।

अब इस व्यख्यान को बताने का मेरा ये उद्देश्य नही है की आप मेरी तारीफ करो या मैंने कोई तीर मार दिया , नही। अगर वो आदमी उस महिला के साथ कुछ गलत करता या बहुत ज्यादा मार पीट करता तो मैं बीच मे जाकर उससे हाथ जोड़ कर रिक्वेस्ट करता की,ऐसा मत करो । लेकिन वो नही मानता तो उससे मुकाबला करता, फिर परिणाम जो भी होता । इस व्यख्यान का ये अर्थ नही की आप हर किसी के फटे में टांग अड़ाते रहो। इसका सिर्फ इतना सा मतलब है गलत का विरोध करना सीखो ,वरना एक दिन पूरा समाज और देश कायर और डरपोक बन जायेगा और सड़कों पर मौत और बलात्कार जैसी घटनाओं का नंगा नाच होगा। दिल्ली के उस लडके ने जो किया सीधा मौत की सजा होनी चाहिए । इस तरह खुले आम बेरहमी से किसी निर्दोष को मारने वालों को सीधा मौत के घाट उतारो । जेल में डाल कर इन जैसे लोगों पर न्ययालय का वक्त और सरकार का पैसा बर्बाद करने का कोई मतलब नही है । इस तरह के पापियों पर कोई रहम नही ।

100 साल की बुढ़ापे वाली जिंदगी नही चाहिए। जिंदगी तभी तक चाहिए जब तक अंदर इंसानियत जिंदा है । भले 30 साल की मिले या 40 साल की । याद रखना -डरपोक और कायर लोग कितने भी पढ़ लें , वो कभी बदलाव नही लाते। ऐसे लोग पढ़ लिख कर चालाक बन जाते हैं । बदलाव वही लाता है जिसके अंदर पढ़ाई के साथ इंसानियत भी जिंदा हो ।

इस लिए 3 चीज़ों पर काम कीजिए।

1) अपनी शारिरिक ताकत बढ़ाएं।

2)अपनी आध्यात्मिक ताकत बढ़ाएं।

3)पढ़ाई द्वारा अपनी बौद्धिक ताकत बढ़ाएं।

क्योकि एक आध्यात्मिक , शारीरिक और बौद्धिक रूप से ताकतवर इंसान ही समाज मे बदलाव ला सकता है । किसी को जरूरत हो उसकी मदत में खड़े होइए।

 

रवि जंघेला (जिला सह संयोजक) 

हिन्दू जागरण मंच सिवनी, महा कौशल प्रांतमध्यप्रदेश।

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