केवलारी (हिन्द शिला) । सिवनी जिले की नगर परिषद केवलारी में भ्रष्टाचार के नए-नए कारनामे देखने को मिल रहे हैं। ताज़ा मामला ओपन भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जहां अधिकारियों ने 13 फरवरी 2025 को निकाय में विभिन्न पदों की भर्ती की निविदा निकाली है, लेकिन यह निविदा स्थानीय अखबार में 22 फरवरी को प्रकाशित की गई। और हैरानी की बात यह है कि नगरवाशी दावा कर रहे है कि जिन जिन अखबारो में निविदा को प्रकाशित किया गया है, वह केवलारी नगर में उसी दिन वितरित ही नहीं हुआ !
क्या कहते हैं सीएमओ चन्द्र किशोर भंवरे
जब इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंद्र किशोर भंवरे से सवाल किया गया तो वह अपना पल्ला झाड़ते हुए इसकी जिम्मेदारी निकाय में पदस्थ धीरेन्द्र पुशाम नामक कर्मचारी पर डाल दी। वहीं, जब नगर परिषद के सूचना पटल को देखा गया तो वहाँ इस निविदा की कोई भी जानकारी अंकित नहीं किया गया ओर न ही सूचना पटल पर चस्पा की गई है। जिससे नगर परिषद केवलारी द्वारा की कर्मचारियों की नियुक्ति में घोटाले की आशंका गहरा रही हैं।
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के बड़े सवाल
1. सूचना पटल पर क्यों नहीं लगी निविदा?
अगर कोई भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होती, तो सूचना पटल पर इसे चस्पा किया जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे संदेह और गहरा जाता है।
2. 13 फरवरी को निकाली गई निविदा 22 फरवरी को अखबारों में क्यों प्रकाशित हुई?
इस देरी के पीछे क्या कारण था? कहीं यह भ्रष्टाचार को छिपाने की साज़िश तो नहीं?
3. स्थानीय लोगों से क्यों छुपाई गई जानकारी?
किसी भी भर्ती प्रक्रिया की जानकारी नगर परिषद कार्यालय और जनसंपर्क कार्यालय में दी जाती है, लेकिन यहाँ यह नियम ताक पर रख दिए गए।
क्या चल रहा था नगर परिषद में?
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि नगर परिषद केवलारी में मनमानी चल रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि अंदरखाने मोटी रकम लेकर अपने लोगों को नियुक्ति देने की तैयारी थी। जब अधिकारी खुद इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, तो सवाल उठता है – क्या वरिष्ठ अधिकारी भी इस खेल में शामिल हैं?

नागरिकों के अधिकारों पर कुठाराघात, सख्त कार्रवाई की मांग।
यह घोटाला केवलारी के नागरिकों के साथ अन्याय है भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने से योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका डाला जा रहा है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंद्र किशोर भंवरे एवं धीरेन्द्र पुशाम पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, इस भर्ती प्रक्रिया को तत्काल निरस्त कर पुनः निष्पक्ष तरीके से भर्ती की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर हमेशा की तरह भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।


