गुणवत्ताहिन हुआ भवन का निर्माण, खतरे में होगा मासूम बच्चों का भविष्य ?
केवलारी (हिन्द शिला)। आंगनवाड़ी केन्द्र छोटे बच्चों की पोषण, स्वास्थय और शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवाएँ के कार्यक्रम के रूप में ग्राम स्तर पर सरकार द्वारा समर्थित एक केंद्र है। आंगनवाड़ी 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों, किशोर युवतियों, गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। प्रत्येक आंगनवाड़ी लगभग 400 से 800 लोगों की जनसंख्या पर बनाई जाती है। जनसंख्या के आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक अथवा एक से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र हो सकते हैं। आंगनवाड़ी कायर्कर्त्ता तथा सहायिक आंगनवाड़ी केंद्र को चलाते हैं तथा स्वास्थय, शिक्षा, ग्रामीण विकास और अन्य विभागों के पधाधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए आईसीडीएस का क्रियान्वयन करते हैं। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु मध्य प्रदेश शासन द्वारा जनजाति कार्य विभाग सिवनी के द्वारा 28.50 लाख रुपयों की लागत से शिवकुमार शिवहरे को भवन निर्माण का ठेका दिया गया था, किंतु स्थानीय लोगों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि उक्त ठेकेदार संबंधित विभाग की मिलीभगत से धड़ल्ले से बेखौफ होकर नियम कानून को अपने जूते की नोक पर रखकर गुणवत्ता विहीन भवन का निर्माण कर रहा है । ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि उक्त आंगनबाड़ी भवन के लिए शासन द्वारा तय ड्राइंग के हिसाब से लोहा एवं अन्य बिल्डिंग मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप कुछ भी बीम एवं कलम अभी से ही झुकती दिखाई पड़ रही हैं, इसके बावजूद भी उक्त विभाग की उपयंत्री श्रीमती बीना मर्सकोले जी द्वारा भवन का मूल्यांकन कर तमाम नियम एवं कानून को दर किनार करते हुए ठेकेदार को अधिकांश भुगतान कर दिया गया है ,जो कि नियम विरुद्ध है । इस संबंध में विगत कुछ माह पूर्व स्थानीय व्यक्तियों द्वारा उक्त गुणवत्ता विहिन निर्माण के संबंध में संबंधित विभाग के कार्यालय में लिखित एवं मध्य प्रदेश शासन की सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई थी किंतु संबंधित विभाग द्वारा आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आती है । अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मामला सार्वजानिक होने के बाद जिम्मेदार पदों पर नियुक्त सरकारी नुमाइदो की कुंभकरणी नींद पर खलल पड़ता है या कमीशन रूपी लोरी सुनकर पुर्व की तरह मामले को संज्ञान में नहीं लिया जाता यह तो समय की गर्त में छिपा है ।



