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Wednesday, April 22, 2026

सच्चे पत्रकारों का षडयंत्र पूर्वक किया जा रहा है दमन

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निनिष्पक्ष पत्रकारिता करना हुआ ,अत्यंत जोखिम भरा कार्य, स्वयं के साथ-साथ परिवार को भी झेलनी पड़ती है प्रताड़ना !

माफिया एवं भ्रष्ट अधिकारी मिलकर निष्पक्ष एवं इमानदार पत्रकारों के खिलाफ रचते हैं षड्यंत्र खिलवाते हैं जेल की हवा !

घंसौर ( हिन्द शिला))। आज के युग में पत्रकारिता के भी अनेक माध्यम हो गये हैं; जैसे – अखबार, पत्रिकायें, रेडियो, न्यूज चैनल, वेब-पत्रकारिता , शोसल मीडिया आदि। बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अन्तर्सम्बन्धों ने पत्रकारिता की विषय-वस्तु तथा प्रस्तुति शैली में व्यापक परिवर्तन हो रहें है। वर्तमान में भारतीय पत्रकारिता सरकारी गजट या नोटिफ़िकेशन बनकर रह गई है।‌ लगभग अधिकांश मिडिया संस्थान और‌ न्यूज चैनल दिन रात सरकार का गुणगान करते नहीं थक रहे हैं। जो पत्रकार या न्यूज़ चैनल सरकार के खिलाफ या भ्रष्ट एवं रिश्वतखोर कर्मचारियों अधिकारियों माफियाओं के खिलाफ खबर का प्रकाशन करते हैं उनके खिलाफ लिखने या बोलने की हिमाकत करते हैं तो उन्हें तरह-तरह के षड्यंत्र में फंसा कर जेल भेजा जाता है, उन्हें और उनके परिवार को अनेक प्रकार की प्रताड़ना एवं यातनाओं का सामना करना पड़ता है। जबकि सामाजिक सरोकारों तथा सार्वजनिक हित से जुड़कर ही पत्रकारिता सार्थक बनती है। सामाजिक सरोकारों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुँचाने और शासन प्रशासन की जनहितकारी नीतियों एवं योजनाओं को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता है। पत्रकारिता को लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ भी कहा जाता है। कोई भी लोकतन्त्र तभी सशक्त है जब पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी सार्थक भूमिका निभाती रहे। सार्थक पत्रकारिता का उद्देश्य ही यह होना चाहिए कि वह प्रशासन और समाज के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी की भूमिका अपनाये। इण्टरनेट और सूचना के आधिकार अधिनियम ने आज की पत्रकारिता को बहुआयामी और अनन्त बना दिया है। आज कोई भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध की और कराई जा सकती है। इसके ठीक विपरित विज्ञापनों से होने वाली अथाह कमाई ने पत्रकारिता को काफी हद्द तक व्यावसायिक बना दिया है। मीडिया का लक्ष्य आज आधिक से आधिक कमाई का हो चला है। मीडिया के इसी व्यावसायिक दृष्टिकोण का नतीजा है कि उसका ध्यान सामाजिक सरोकारों से कहीं भटक गया है। मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता के बजाय आज इन्फोटेमेंट ही मीडिया की सुर्खियों में रहता है। जबकि लोकतन्त्र के हित में यही है कि जहाँ तक हो सके पत्रकारिता को स्वतन्त्र और निर्बाध रहने दिया जाए, और पत्रकारिता का अपना हित इसमें है कि वह आभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का उपयोग समाज और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने दायित्वों के ईमानदार निवर्हन के लिए करती रहे। पत्रकारिता की इन्हीं उद्देश्यों एवं निस्वार्थ भावना से तमाम जोखिमों के बावजूद अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे घंसौर तहसील के प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ पत्रकार लखन सिंह सोलंकी जी को भारी पड़ गया। आपको बता दें कि श्री सोलंकी ने हमें बताया कि विगत 10 वर्षों से प्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार प्रदेश टुडे में घंसौर संवाद के रूप में कार्य कर रहे हैं । घंसौर तहसील की प्रत्येक घटनाक्रम को ख़बर के रुप में पूरी तटस्था के साथ अपने अखबार पर स्थान दिलवाने का कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा बताया गया कि अपनी पत्रकारिता की उम्र में उनके द्वारा अनेकों शोषित, पीड़ित, वंचित की आवाज बनाकर उनका हक एवं उन्हें न्याय दिलवाया गया है । जनहित के अनेक मुद्दों को शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर सुगम एवं बेहतर व्यवस्था कायम करवाई गई है । इसी कड़ी में वह दिनांक 19/07/ 2023 को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ब्लॉक इकाई घंसौर के द्वारा सिवनी जिला कलेक्टर के नाम अनुविभागीय अधिकारी घंसौर को ज्ञापन सोपा गया था जिस पर उल्लेख किया गया था कि ग्राम घंसौर मे शासकीय भूमि पर कब्जा कर ग्राम के कुछ लोगो के द्वारा अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किये जा रहा है (बिरसा मुण्डा चौराहा राजस्य निखिक कार्यालय के पास) चंसौर जिस खसरे मे आर. आई. कार्यालय बना है, उसी खसरे पर अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है ग्राम पंचायत घंसौर पैसा एक्ट के तहत आता है इसलिटी ग्राम सभा की अनुमति निर्माण कार्य मे आवश्यक है अतः निर्माण ऐजेंसी द्वारा न ग्राम पंचायत पंसौर और न ही राजस्व विभाग तहसीलदार / अनुविभागीय अधिकारी द्वारा किसी प्रकार की अनुमति नहीं की गई है और न ही भूमि का मद परिवर्तन किया गया है लेकिन उक्त भूमि मैन रोड से लगी हुई तथा भविष्य में किसी भी शासकीय कार्यालय बनाने के लिये उपयुक्त है । आर. आई. कार्यालय का भी विस्तारीकरण किया जा सकता है इसी जगह पर मंदिर बनाने की चर्चा हो रही है। उक्त संबंध में ज्ञापन देते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, संपूर्ण घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ पत्रकार लाखन सिंह सोलंकी द्वारा अपने अखबार पर खबर का प्रकाशन किया गया, जिससे नाराज होकर घंसौर क्षेत्र के चंद व्यक्तियों द्वारा उनके खिलाफ षडयंत्र पूर्वक घंसौर थाने में झूठी शिकायत दर्ज करवाई गई एवं कार्रवाई की मांग की गई जिसे घंसौर पुलिस द्वारा आईपीसी की धारा 384, 420 के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है इस संबंध में घंसौर पुलिस का कहना है की शिकायत मिलने के उपरांत कार्रवाई की गई है जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

 

खबर से बौखलाकर की, गई झूठी शिकायत ! बदनाम करने का रचा गया षड्यंत्र।

 

इस पूरे मामले में वरिष्ठ पत्रकार लखन सिंह सोलंकी का कहना है कि, उन्हें षडयंत्र पूर्वक फंसाया जा रहा है उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई जा रही है, यदि शिकायत में सच्चाई होती तो जिस दिन मेरे द्वारा पैसे की मांग की गई थी तो शिकायतकर्ताओ द्वारा उसी दिन थाने में जाकर शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई ? मेरे द्वारा खबर के प्रकाशन के इतने दिनों बाद सोची समझी साजिश एवं संयंत्र के तहत झूठी शिकायत दर्ज करवाई गई है । जबकि वह पूर्ण रूप से निर्दोष है। प्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार प्रदेश टुडे के अधिकृत घंसौर तहसील के संवाददाता हैं।

 

पत्रकारों के खिलाफ हो रहा लगातार कुठाराघात लोकतंत्र के लिए है खतरा ?

 

मिडिया के प्रति शत्रुता/विद्वेष जिसे राजनीतिक नेताओं द्वारा खुले तौर पर प्रोत्साहित किया जाता है, लोकतंत्र के लिये एक बड़ा खतरा है। जो पत्रकार या न्यूज़ चैनल सरकार के खिलाफ सच्ची खबरों का प्रकाशन करते हैं उन्हें सरकार द्वारा विनियमन, फर्ज़ी खबरों और सोशल मीडिया के अधिक प्रभाव पर नियंत्रण के नाम पर मीडिया पर दबाव बनाया जाना इस क्षेत्र के लिये बहुत ही खतरनाक है। भ्रष्टाचार से प्रेरित पेड न्यूज़, एडवर्टोरियल (लेख/संपादकीय के रूप में विज्ञापन का प्रकाशन) और फर्ज़ी खबरें स्वतंत्र तथा निष्पक्ष मीडिया के लिये बड़ा खतरा हैं। पत्रकारों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है, संवेदनशील मुद्दों को कवर करने वाले पत्रकारों पर हमले या उनकी हत्या बहुत आम बात हो गई है। कई मामलों में सोशल मीडिया पर पत्रकारों को लक्षित करने वाले घृणास्पद/द्वेषपूर्ण भाषणों को साझा एवं प्रसारित किया जाता है, साथ ही इनके माध्यम से सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले पत्रकारों को लक्षित और प्रताड़ित किया जाता है। व्यावसायिक समूहों और राजनीतिक शक्तियों का मीडिया के बड़े हिस्से (प्रिंट और विज़ुअल दोनों) पर मज़बूत हस्तक्षेप है, जिससे निहित स्वार्थ में वृद्धि और मीडिया की स्वतंत्रता को क्षति पहुँच रही है।

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